लकवा के 5 प्रकार कौन से हैं?HealthPlanet

Posted on Wed 30th Nov 2022 : 11:57

लकवा (पैरालिसिस) के प्रकार

मानव का शरीर एक जटिल संरचना है, जिसकी उलझी हुई गुत्थियों को सुलझाने की कोशिश चिकित्सा विज्ञान करता रहता है। वहीं, शरीर के कुछ कष्ट ऐसे हैं, जिन पर पूरी तरह नियंत्रण संभव नहीं हो सका है। ऐसा ही एक कष्ट है लकवा यानी पैरालिसिस होना। शरीर के लकवाग्रस्त हो जाने पर बीमार व्यक्ति को काफी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है और पैरालिसिस का इलाज भी जटिल प्रक्रिया है। स्टाइलक्रेज के इस आर्टिकल में हम इस बीमारी के लक्षण, प्रकार और बचाव पर चर्चा करेंगे। साथ ही हम ये जानने की भी कोशिश करेंगे कि लकवा का उपचार कैसे किया जा सकता है।
लकवा क्या है?

लकवा को पैरालिसिस और पक्षाघात भी कहा जाता है। इसका मतलब मांसपेशियों की कार्यप्रणाली का प्रभावित होना है। इस अवस्था में शरीर के किसी एक हिस्से की मांसपेशियां काम करना बंद कर देती हैं। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है, जब मस्तिष्क और मांसपेशियों के बीच संदेश का आदान-प्रदान ठीक तरीके से नहीं हो पाता। लकवा पूर्ण या आंशिक हो सकता है। यह शरीर के एक या दोनों तरफ हो सकता है। यह सिर्फ एक क्षेत्र में या पूरे शरीर में भी हो सकता है। यह दोनों पैरों सहित शरीर के निचले आधे हिस्से, हाथ और पैर को प्रभावित कर सकता है (1)।
लकवा के प्रकार

लकवा के प्रकार कई हैं। इसे आसानी से समझाने के लिए हम इसे प्रभावित हिस्से, समय व अवधि के हिसाब से बांट रहे हैं (2)।
प्रभावित हिस्से के आधार पर:

मोनोपलेजिया (Monoplegia) : इस लकवे व पक्षाघात में शरीर का केवल एक अंग प्रभावित होता है। मोनोपलेजिया लकवे में आमतौर पर एक बांह प्रभावित होती है (3)।

हेमीपलेजिया (Hemiplegia) : एक तरफ का हिस्सा प्रभावित होने को हेमीपलेजिया लकवा कहा जाता है। इस पेरालिसिस के प्रकार में बॉडी के एक ही साइड का एक हाथ, एक पैर और ट्रंक (पेट, कंधा, सीना) प्रभावित होता है (4)।

क्वाड्रिप्लेजिया (Quadriplegia) : पेरालिसिस के इस प्रकार को टेट्राप्लेजिया के नाम से भी जाना जाता है। इसमें व्यक्ति के शरीर की दोनों बांह और दोनों पैर प्रभावित होते हैं (5)।

पैरापलेजिया (paraplegia) : कमर से नीचे के अंगों में होने वाले पक्षाघात को पैरापलेजिया लकवा कहा जाता है। इस पेरालिसिस के प्रकार में व्यक्ति के दोनों पैर प्रभावित होते हैं (5)।

बेल्स पेल्से (Bell’s Palsy) : पक्षघात के इस प्रकार में व्यक्ति की मांसपेशियां कमजोर होने की वजह से चेहरे पर लकवा होता है। इस दौरान चेहरा थोड़ा-टेढ़ा हो जाता है, जिससे बोलने और खाने-पीने में समस्या होने लगती है (6)।

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